बेवफाई का इल्ज़ाम -बेवफा शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

हमने चाहा था जिसे उसे दिल से भुलाया न गया,जख्म अपने दिल का लोगों से छुपाया न गया,बेवफाई के बाद भी प्यार करता है दिल उनसे, कि बेवफाई का इल्ज़ाम भी उस पर लगाया न गया।

बेवफा शायरी

Related Post

बेवफ़ा कहाँ तक है( एडमिन द्वारा दिनाँक 11-10-2015 को प्रस्तुत )ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक है,तू सितम कर ले, तेरी हसरत जहाँ तक हैवफ़ा की उम्मीद, जिन्हें होगी उन्हें होगी,हमें तो देखना...

चलो खेलें वही बाजीजो पुराना खेल है तेरा,तू फिर से बेवफाई करनामैं फिर आँसू बहाऊंगा। - बेवफा शायरी

नज़ारे तो बदलेंगे ही ये तो कुदरत है,अफ़सोस तो हमें तेरे बदलने का हुआ है। बेवफा शायरी

मेरे नाम से बदनाम( एडमिन द्वारा दिनाँक 04-12-2016 को प्रस्तुत )मुझे तू अपना बना या न बना तेरी खुशी,तू ज़माने में मेरे नाम से बदनाम तो है। - बेवफा शायरी

भले किसी ग़ैर की जागीर थी वो,पर मेरे ख्वाबों की तस्वीर थी वो,मुझे मिलती तो कैसी मिलती - किसी और के हिस्से की तकदीर थी वो । बेवफा शायरी

वो बेवफा ना आई( प्रदीप कुमार द्वारा दिनाँक 17-10-2017 को प्रस्तुत )जल-जल के दिल मेरा जलन से जल रहा,एक अश्क मेरे आँख में मुद्दत से पल रहा,जिसका मैं कर रहा हूँ घुट-घुट के इंतजार,वो बेवफा...

leaf-right
leaf-right