मगर अब नहीं – सैड शायरी

कभी मैं भी तेरी मोहब्बत के नशे में था,
मेरी आँख में भी खुमार था,
मगर अब नहीं,
कभी ये दिल बाग़-ओ-बहार था,
मगर अब नहीं,
तेरा ज़िक्र वजह-ए-करार था,
मगर अब नहीं।

- सैड शायरी

Related Post

उनको ये शिकायत है कि मैं बेवफाई पे नहीं लिखता,और मैं सोचता हूं कि मैं उनकी रुसवाई पे नहीं लिखता,ख़ुद अपने से ज्यादा बुरा जमाने में कौन है?मैं इसलिए औरों की बुराई पे नहीं लिखता,कुछ...

दुनिया में मैं अपनी कमी छोड़ जाऊंगा,राहों पर इंतजार की लकीर छोड़ जाऊंगा,याद रखना एक दिन मुझे ढूढ़ते फिरोगे,आँखों में आपके मैं नमी छोड़ जाऊंगा। - सैड शायरी

तू हवा के रुख पे चाहतों कादिया जलाने की ज़िद न कर,ये क़ातिलों का शहर है यहाँ तूमुस्कुराने की ज़िद न कर। सैड शायरी

गुमनामी का अँधेरा कुछ इस तरह छा गया है,कि दास्ताँ बन के जीना भी हमें रास आ गया है। - सैड शायरी

कितनी जल्दी थी उसको रूठ जाने की,आवाज़ तक न सुनी दिल के टूट जाने की। सैड शायरी

शेर-ओ-शायरी तो दिल बहलाने का ज़रिया है जनाब,लफ़्ज़ काग़ज़ पर उतारने से महबूब लौटा नहीं करते। सैड शायरी

leaf-right
leaf-right