महफ़िल में हँसना – ग़म शायरी

महफ़िल में हँसना हमारा मिजाज बन गया,
तन्हाई में रोना एक राज बन गया,
दिल के दर्द को चेहरे से जाहिर न होने दिया,
बस यही जिंदगी जीने का अंदाज बन गया।

- ग़म शायरी

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प्यार की राह में ग़म का अँधेरा आता क्यूँ है,जिसको हमने चाहा वही रुलाता क्यूँ है,वो मेरे नसीब में नहीं है तो खुदा,बार-बार हमें उसी से मिलाता क्यूँ है। ग़म शायरी

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आधी से ज्यादा शब-ए-ग़म काट चुका हूँ,अब भी अगर आ जाओ तो ये रात बड़ी है। - ग़म शायरी

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