मेरी चाहत को मेरी -शिक़वा शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

मेरी चाहत को मेरी हालत की तराजू में ना तोल,मैंने वो ज़ख्म भी खाऐं हैं जो मेरी किस्मत में नहीं थे ।

शिक़वा शायरी

Related Post

तुमने चाहा ही नहीं( एडमिन द्वारा दिनाँक 08-05-2017 को प्रस्तुत )तुमने चाहा ही नहीं ये हालात बदल सकते थे,तुम्हारे आँसू मेरी आँखों से भी निकल सकते थे,तुम तो ठहरे रहे झील के पानी की तरह...

करूँगा क्या जो हो( एडमिन द्वारा दिनाँक 04-10-2015 को प्रस्तुत )करूँगा क्या जो हो गया नाकाम मोहब्बत में,मुझे तो कोई और काम भी नहीं आता इसके सिवा। - शिक़वा शायरी

तुमने चाहा ही नहीं ये हालात बदल सकते थे,तुम्हारे आँसू मेरी आँखों से भी निकल सकते थे,तुम तो ठहरे रहे झील के पानी की तरह बस,दरिया बनते तो बहुत दूर निकल सकते थे। शिक़वा शायरी

कभी जो मिलें फुरसत तो बताना जरूर...वो कौन सी मौहब्बत थी जो मैं ना दे सका । - शिक़वा शायरी

रिश्ता नहीं रखना तो हम पर नज़र क्यों रखते हो,जिन्दा हैं या मर गए तुम ये खबर क्यों रखते हो..? - शिक़वा शायरी

ज़माने भर की निगाहों मेंजो खुदा सा लगे,वो अजनबी है मगरमुझ को आशना सा लगे,न जाने कब मेरीदुनिया में मुस्कुराएगा,वो शख्स जो ख्वाबोंमें भी खफा सा लगे । शिक़वा शायरी

leaf-right
leaf-right