मेरे वजूद की हद – एटीट्यूड शायरी

मुझको मेरे वजूद की हद तक न जानिए,
बेहद हूँ बेहिसाब हूँ बेइन्तहा हूँ मैं।

- एटीट्यूड शायरी

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सर झुकाने की आदत नहीं है,आँसू बहाने की आदत नहीं है,हम खो गए तो पछताओगे बहुत,क्योंकि...हमारी लौट आने की आदत नहीं है। - एटीट्यूड शायरी

उसकी मोहब्बत और मेरी फ़ितरत में फर्क सिर्फ इतना है...कि उसका एटीट्यूड नहीं जाता और मुझे झुकना नहीं आता। - एटीट्यूड शायरी

ठोकर ना लगा मुझे( एडमिन द्वारा दिनाँक 23-02-2016 को प्रस्तुत )ठोकर ना लगा मुझे पत्थर नहीं हूँ मैं,हैरत से ना देख कोई मंज़र नहीं हूँ मैं,तेरी नज़र में मेरी कदर कुछ भी नही,मगर उनसे पूछ...

तेरी मर्जी से ढल जाऊं हर बार ये मुमकिन नहीं,मेरा भी अपना वजूद है, मैं कोई आइना नहीं। - एटीट्यूड शायरी

एट्टीट्यूड तो हम मरने के बाद भीदिखाएंगे - दुनिया पैदल चलेगी और हमकंधो पर। एटीट्यूड शायरी

अपनी मोहब्बत के लिए आशियाना बदल देंगे,दिल ने चाहा तो ये फ़साना बदल देंगे,अरे दुनिया वालों तुम्हारी हस्ती ही क्या है,जरूरत पड़ी तो सारा ज़माना ही बदल देंगे। एटीट्यूड शायरी

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