मै शराबी क़्यूं हुआ -शराब शायरी

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  • October 31, 2021

ये ना पूछ मै शराबी क़्यूं हुआ,बस यूं समझ ले..गमों के बोझ से, नशे की बोतल सस्ती लगी ।

शराब शायरी

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मोहब्बत बिकती है यहाँ इश्क़ नीलाम होता है,भरोसे का क़त्ल यहाँ पर खुले आम होता है,ज़माने से मिली ठोकर तो चले हम मैखाने में,अब वही ज़माना हमें शराबी नाम देता है। - शराब शायरी

कभी देखेंगे ऐ जाम तुझे होठों से लगाकर,तू मुझमें उतरता है कि मैं तुझमें उतरता हूँ। - शराब शायरी

अगर ग़म मोहब्बत पे हाबी न होता,खुदा की कसम मैं शराबी न होता। - शराब शायरी

होने को आई शाम, इन गहराए बादलो में,तन को लगी शीतल बहार, तलब हुई मयखानों की। शराब शायरी

छीनकर हाथों से जाम( एडमिन द्वारा दिनाँक 04-07-2015 को प्रस्तुत )छीनकर हाथों से जामवो इस अंदाज़ से बोली,कमी क्या है इन होठों मेंजो तुम शराब पीते हो । - शराब शायरी

मय छलक जाए तो कमजर्फ हैं पीने वाले,जाम खाली हो तो साकी तेरी रूसवाई है। शराब शायरी

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