यह बात यह तबस्सुम -तारीफ़ शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

यह बात, यह तबस्सुम,यह नाज, यह निगाहें,आखिर तुम्ही बताओक्यों कर न तुमको चाहें।

तारीफ़ शायरी

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तेरी आँखों के सिवा( एडमिन द्वारा दिनाँक 28-08-2016 को प्रस्तुत )मैने समझा था कि तू है तो दरख़्शां है हयात,तेरा ग़म है तो ग़मे-दहर का झगड़ा क्या है,तेरी सूरत से है आलम में बहारों को...

लिख दूं किताबें तेरी मासूमियत परफिर डर लगता है...कहीं हर कोई तेरा तलबगार ना हो जाय । - तारीफ़ शायरी

जलवे मचल पड़े तो सहर का गुमाँ हुआ,ज़ुल्फ़ें बिखर गईं तो स्याह रात हो गई। तारीफ़ शायरी

आँखें तुम्हारी( अब्दुल वारिस द्वारा दिनाँक 06-05-2018 को प्रस्तुत )कितनी खूबसूरत हैं आँखें तुम्हारी,बना दीजिये इनको किस्मत हमारी,इस ज़िंदगी में हमें और क्या चाहिए,अगर मिल जाए मोहब्बत तुम्हारी। - तारीफ़ शायरी

गले मिला है वो मस्त-ए-शबाब बरसों में,हुआ है दिल को सुरूर-ए-शराब बरसों में,निगाह-ए-मस्त से उसकी हुआ ये हाल मेरा,कि जैसे पी हो किसी ने शराब बरसों में। - तारीफ़ शायरी

कैदखाने हैं बिना सलाखों के,कुछ यूं चर्चे हैं तेरी आँखों के। - तारीफ़ शायरी

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