याद करना ना लौटा सकोगे -शिक़वा शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

मैं अपनी चाहतों का हिस्सा जो लेने बैठ जाऊं,तो सिर्फ मेरा याद करना भी ना लौटा सकोगे ।

शिक़वा शायरी

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उसका चेहरा भी सुनाता हैं कहानी उसकी,चाहता हूँ कि सुनूं उससे जुबानी उसकी,वो सितमगर है तो अब उससे शिकायत कैसी,क्योंकि सितम करना भी आदत हैं पुरानी उसकी। शिक़वा शायरी

चाहा था तुम्हें( एडमिन द्वारा दिनाँक 20-10-2017 को प्रस्तुत )तुम मेरे लिए अब कोई इल्जाम न ढूँढो,चाहा था तुम्हें एक यही इल्जाम बहुत है। - शिक़वा शायरी

लब पे आएगी बात( एडमिन द्वारा दिनाँक 11-07-2017 को प्रस्तुत )उनसे कह दो मुझे खमोश ही रहने दें 'वसीम',लब पे आएगी तो हर बात गिराँ गुज़रेगी।~ वसीम बरेलवी - शिक़वा शायरी

मोहब्बत में लाखों ज़ख्म( एडमिन द्वारा दिनाँक 05-06-2016 को प्रस्तुत )मोहब्बत में लाखों ज़ख्म खाए हमने,अफ़सोस उन्हें हम पर ऐतबार नहीं,मत पूछो क्या गुजरती है दिल पर,जब वो कहते है हमें तुमसे प्यार नहीं। -...

उनकी नजर में कोई फर्क आज भी नहीं,पहले मुड़कर देखते थे अब देखकर मुड़ जाते हैं।⁠⁠⁠⁠ - शिक़वा शायरी

रूठने का अंदाज शायरी( एडमिन द्वारा दिनाँक 15-12-2015 को प्रस्तुत )रूठा अगर तुझसे तो इस अंदाज से रूठूंगा,तेरे शहर की मिट्टी भी मेरे वजूद को तरसेगी। - शिक़वा शायरी

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