ये न जाने थे -दो लाइन शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

ये न जाने थे कि उस महफ़िल में दिल रह जाएगा,हम ये समझे थे कि चले आएँगे दम भर देख कर।

दो लाइन शायरी

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मुद्दत के बाद उसने जो आवाज़ दी मुझे,कदमों की क्या बिसात थी, साँसे ठहर गयीं। दो लाइन शायरी

मुझसे हर बार नज़रें चुरा लेती है वो,मैंने कागज़ पर भी बना के देखी हैं आँखें उसकी । दो लाइन शायरी

जिनके दिल में( एडमिन द्वारा दिनाँक 24-11-2015 को प्रस्तुत )बच के रहना ऐसे लोगों से मेरे दोस्तों,जिनके दिल में भी एक दिमाग रहता है। - दो लाइन शायरी

मुकद्दर की लिखावट का इक ऐसा भी कायदा हो,देर से क़िस्मत खुलने वालों का दुगुना फ़ायदा हो।-------------------------------------- मैं नासमझ ही सही मगर वो तारा हूँ जो,तेरी एक ख्वाहिश के लिए सौ बार टूट जाऊं।-------------------------------------- क्यों...

इरादे बाँधता हूँ, सोचता हूँ, तोड़ देता हूँ,कहीं ऐसा न हो जाये, कहीं वैसा न हो जाये। दो लाइन शायरी

कहीं ऐसा न हो जाये( एडमिन द्वारा दिनाँक 29-11-2016 को प्रस्तुत )इरादे बाँधता हूँ, सोचता हूँ, तोड़ देता हूँ,कहीं ऐसा न हो जाये, कहीं वैसा न हो जाये। - दो लाइन शायरी

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