ये लम्हा ये वक़्त -हिंदी उर्दू ग़ज़ल

  • By Admin

  • October 31, 2021

काश ये लम्हा ये वक़्त यूं ही गुजर जाता,तू सामने होती और वक़्त ठहर जाता - ।

हिंदी उर्दू ग़ज़ल

Related Post

हम तो हर बार मोहब्बत से( एडमिन द्वारा दिनाँक 13-05-2015 को प्रस्तुत )हम तो हर बार मोहब्बत से सदा देते हैं,आप सुनते हैं और सुनके भुला देते हैं,ऐसे चुभते हैं तेरी याद के खंजर मुझको,भूल...

अब तेरे शहर में रहने को बचा ही क्या है,जुदाई सह ली तो सहने को बचा ही क्या है। - हिंदी उर्दू ग़ज़ल

हर एक चेहरे पर मुस्कान मत खोजो,किसी के नसीब का अंजाम मत खोजो। - हिंदी उर्दू ग़ज़ल

खुद को इतना भी मत बचाया कर,बारिशें हो तो भीग जाया कर,चाँद लाकर कोई नहीं देगा,अपने चेहरे से जगमगाया कर,दर्द आँखों से मत बहाया कर,काम ले कुछ हसीन होंठो से,बातों-बातों में मुस्कुराया कर,धूप मायूस लौट...

जवानी का मोड़( एडमिन द्वारा दिनाँक 09-01-2016 को प्रस्तुत )लोग हर मोड़ पे रुक-रुक के संभलते क्यों हैं,इतना डरते हैं तो फिर घर से निकलते क्यों हैं,मैं न जुगनू हूँ, दिया हूँ न कोई तारा...

रात भर तन्हा( एडमिन द्वारा दिनाँक 11-10-2015 को प्रस्तुत )जमाना सो गया और मैं जगा रातभर तन्हातुम्हारे गम से दिल रोता रहा रातभर तन्हा ।मेरे हमदम तेरे आने की आहट अब नहीं मिलतीमगर नस-नस में...

leaf-right
leaf-right