रोने से तसल्ली – दर्द शायरी

वक़्त ही दर्द के काँटों पे सुलाए दिल को,
वक़्त ही दर्द का एहसास मिटा देता है,
रोने से तसल्ली कभी हो जाती थी,
अब तबस्सुम मेरे होंठों को जला देता है।

- दर्द शायरी

Related Post

रिहाई दे दो हमें अपनी मोहब्बत की कफस से,कि अब ये दर्द हमसे और सहा नहीं जाता।(कफस - पिंजड़ा) - दर्द शायरी

न कर तू इतनी कोशिशे,मेरे दर्द को समझने की,पहले इश्क़ कर,फिर चोट खा,फिर लिख दवा मेरे दर्द की। दर्द शायरी

ज़ख्मों की बहार( एडमिन द्वारा दिनाँक 29-10-2019 को प्रस्तुत )तुमने जो दिल के अँधेरे में जलाया था कभी,वो दिया आज भी सीने में जला रखा है,देख आ कर दहकते हुए ज़ख्मों की बहार,मैंने अब तक...

आइना भी रूठा( प्रियादीप द्वारा दिनाँक 07-11-2016 को प्रस्तुत )वो जो तुमसे रुबरु करवाता है,आजकल वो आइना भी हमसे रूठा है। - दर्द शायरी

ये शायरी कुछ और नहींबेइंतहा इश्क है,तड़प उनकी उठती हैऔर दर्द लफ्जों में उतर आता है। - दर्द शायरी

बयाँ करना मोहब्बत कोआसान ना हुआ था । - दर्द शायरी

leaf-right
leaf-right