लकीरों की पहेलियाँ -दो लाइन शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

अजीब सी पहेलियाँ हैं मेरे हाथों की लकीरों में,लिखा तो है सफ़र मगर मंज़िल का निशान नहीं।

दो लाइन शायरी

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कभी तिनके, कभी पत्ते, कभी खुशबू उड़ा लाई,हमारे घर तो आँधी भी कभी तनहा नहीं आई। - दो लाइन शायरी

अब ढूढ़ रहे हैं वो मुझको भूल जाने के तरीके,खफा होकर उसकी मुश्किलें आसान कर दी मैंने । - दो लाइन शायरी

दो-चार नहीं मुझको - बस एक दिखा दो,वो शख़्स जो बाहर से भी अन्दर की तरह हो। दो लाइन शायरी

अपनी तस्वीर बनाओगे तो अहसास होगा,कितना दुश्वार है खुद को कोई चेहरा देना। - दो लाइन शायरी

वख्त-ए-तह में रहने दो राज रिश्तों के...आजकल किताबों से उड़ने लगी हैं तहरीरें हवा में। - दो लाइन शायरी

परवाने को शमा पर जल कर कुछ तो मिलता होगा,सिर्फ मरने की खातिर तो कोई प्यार नहीं करता । दो लाइन शायरी

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