लिख दूं किताबें तेरी -तारीफ़ शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

लिख दूं किताबें तेरी मासूमियत परफिर डर लगता है - कहीं हर कोई तेरा तलबगार ना हो जाय ।

तारीफ़ शायरी

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लिख दूं किताबें तेरी( Admin द्वारा दिनाँक 22-09-2015 को प्रस्तुत )लिख दूं किताबें तेरी मासूमियत परफिर डर लगता है...कहीं हर कोई तेरा तलबगार ना हो जाय । - तारीफ़ शायरी

मै तो फना हो गया उसकीएक झलक देखकर, तारीफ़ शायरी

आँखें तेरी हैं जाम की तरह,एक बार देखूं तो नशा छा जाये,होंठ तेरे जैसे खिलते कँवल,बोले तो हर चीज़ महक जाये,बाल हैं तेरे नागिन जैसे,जैसे आसमान पे काली घटा छाए,गालों पे वो गुलाब की सुर्खी,मुझ...

इस प्यार का अंदाज़ कुछ ऐसा है,क्या बताये ये राज़ कैसा है;कौन कहता है कि आप चाँद जैसे हो,सच तो ये है कि खुद चाँद आप जैसा है। तारीफ़ शायरी

कम से कम अपने बाल तो बाँध लिया करो ।कमबख्त..बेवजह मौसम बदल दिया करते हैं । तारीफ़ शायरी

बहारो फूल बरसाओ( एडमिन द्वारा दिनाँक 11-08-2016 को प्रस्तुत )बहारों फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है,हवाओं रागिनी गाओ मेरा महबूब आया है।ओ लाली फूल की मेंहँदी लगा इन गोरे हाथों में,उतर आ ऐ घटा काजल,...

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