वो बिछड़ गये -तन्हाई शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

और क्या लिखूं - अपनी जिन्दगी के बारे में,जो जिन्दगी हुआ करते थे वो ही बिछड़ गये।

तन्हाई शायरी

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वो शख्स भरी महफिल में भी मेरी तरह तन्हा है,उसे ना पीने का शौक है - ना पिलाने का। तन्हाई शायरी

कुछ ये शाम उदास है कुछ मेरा दिल उदास है,ये शहर तो रोशन है महफ़िलों की रौशनी में,फिर क्यूँ मुझे तन्हाई का एहसास है,वो दूर थे तो मेरे बहुत करीब थे,क्यूँ दूरियाँ महसूस हुईं आज...

परछाइयों के शहर की तन्हाईयाँ ना पूछ - अपना शरीक-ए-ग़म कोई अपने सिवा ना था । तन्हाई शायरी

इक दर्द छुपा हो सीने में मुस्कान अधूरी लगती है,न जाने क्यूँ बिन तेरे - हर शाम अधूरी लगती है। तन्हाई शायरी

पत्थर की दुनिया जज्वात नहीं समझती,दिल में क्या है वो बात नहीं समझती । तन्हाई शायरी

रातों को जागते रहे( एडमिन द्वारा दिनाँक 14-02-2018 को प्रस्तुत )तुम क्या गए कि वक़्त का अहसास मर गया,रातों को जागते रहे और दिन को सो गए। - तन्हाई शायरी

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