वो सूरज की तरह -ग़म शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

वो सूरज की तरह आग उगलते रहे, हम मुसाफिर सफ़र पे ही चलते रहे, वो बीते वक़्त थे, उन्हें आना न था, हम सारी रात करवट बदलते रहे।

ग़म शायरी

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न हिज्र है, न वस्ल है, अब इसको क्या कहें,फूल शाख पर तो है मगर खिला नहीं रहा। ग़म शायरी

निकल आते हैं आंसू हँसते हँसते,ये किस ग़म की कसक है हर खुशी में। ग़म शायरी

ग़म-ए-इश्क रह गया( एडमिन द्वारा दिनाँक 02-12-2017 को प्रस्तुत )ग़म-ए-इश्क रह गया है ग़म-ए-जुस्तज़ू में ढलकर,वो नजर से छुप गए हैं मेरी जिंदगी बदल कर। - ग़म शायरी

महफ़िल में हँसना हमारा मिजाज बन गया,तन्हाई में रोना एक राज बन गया,दिल के दर्द को चेहरे से जाहिर न होने दिया,बस यही जिंदगी जीने का अंदाज बन गया। ग़म शायरी

तेरी हालत से लगता है( एडमिन द्वारा दिनाँक 03-07-2015 को प्रस्तुत )तेरी हालत से लगता हैतेरा अपना था कोई,वरना...इतनी सादगी से बरबादकोई गैर नहीं करता ।~ क़तील शिफ़ई - ग़म शायरी

ग़म-ए-दुनिया( एडमिन द्वारा दिनाँक 02-03-2019 को प्रस्तुत )ग़म-ए-दुनिया में ग़म-ए-यार भी शामिल कर लो,नशा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें,अब न वो मैं हूँ, न तू है, न वो माज़ी है फ़राज़,जैसे दो साए...

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