शायरी तोहफे में ग़म – ग़म शायरी

दे गया ग़म मुझे तोहफे में मिला वो जब भी,
मैंने एक शख्स को क्यूँ कर भला समझा अपना।

- ग़म शायरी

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भटकते रहे हैं बादल की तरह,सीने से लगा लो आँचल की तरह,ग़म के रास्ते पे ना छोड़ना अकेले,वरना टूट जाएँगे पायल की तरह। ग़म शायरी

हर शरारत को जिसकी था माना मोहब्बत,कोई बनाके यूँ अपना ज़हर दे गया,सितम ऐसा जमाने में कोई और नहीं,वो होकर जुदा ऐसा ग़म दे गया। - ग़म शायरी

शब-ए-ग़म में मुसीबत( एडमिन द्वारा दिनाँक 21-02-2019 को प्रस्तुत )अज़ल भी टल गई देखी गई हालत न आँखों से,शब-ए-ग़म में मुसीबत सी मुसीबत हम ने झेली है।~ शाद अज़ीमाबादी - ग़म शायरी

ग़म-ए-इश्क रह गया है ग़म-ए-जुस्तज़ू में ढलकर,वो नजर से छुप गए हैं मेरी जिंदगी बदल कर। - ग़म शायरी

हम भी कभी मुस्कुराया करते थे, उजाले मेरे दर पर शोर मचाया करते थे, उसी दिए ने जला दिया मेरे हाथों को, जिस दिये को हम हवा से बचाया करते थे। - ग़म शायरी

हर शरारत को जिसकी था माना मोहब्बत,कोई बनाके यूँ अपना ज़हर दे गया,सितम ऐसा जमाने में कोई और नहीं,वो होकर जुदा ऐसा ग़म दे गया। ग़म शायरी

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