शिकायतें सारी – शिक़वा शायरी

शिकायतें सारी जोड़ जोड़ कर रखी थी मैंने,
उसने गले लगाकर सारा हिसाब बिगाड़ दिया।

- शिक़वा शायरी

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पत्थरों से दुआ( दुर्गा द्वारा दिनाँक 01-02-2018 को प्रस्तुत )जब मोहब्बत को लोग खुदा मानते हैं,फिर क्यूँ प्यार करने वालों को बुरा मानते हैं,माना कि ये ज़माना पत्थर दिल है,फिर क्यूँ लोग पत्थरों से दुआ...

ज़माना खड़ा है( एडमिन द्वारा दिनाँक 22-04-2015 को प्रस्तुत )ज़माना खड़ा है हाथों में पत्थर लेकर,कहाँ तक भागूं शीशे का मुक़द्दर लेकर । - शिक़वा शायरी

ज़िन्दगी से मेरी आदत( एडमिन द्वारा दिनाँक 15-06-2015 को प्रस्तुत )ज़िन्दगी से मेरी आदत नहीं मिलती,मुझे जीने की सूरत नहीं मिलती,कोई मेरा भी कभी हमसफ़र होता,मुझे ही क्यूँ मुहब्बत नहीं मिलती । - शिक़वा शायरी

खुशबू मोहब्बत की( एडमिन द्वारा दिनाँक 28-06-2017 को प्रस्तुत )राख से भी आएगी खुशबू मोहब्बत की,मेरे खत तुम सरेआम जलाया ना करो। - शिक़वा शायरी

हमसे कहा होता( एडमिन द्वारा दिनाँक 04-12-2017 को प्रस्तुत )औरों से कहा तुमने... औरों से सुना तुमने,कभी हमसे कहा होता कभी हमसे सुना होता। - शिक़वा शायरी

कब तलक तुझपे इंहिसार करें,क्यों न अब दूसरों से प्यार करें,तू कभी वक़्त पर नहीं पहुंचा,किस तरह तेरा ऐतबार करें।- सईद वासी शाह शिक़वा शायरी

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