शुक्रिया ऐ ज़िन्दगी -जिंदगी शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

शुक्रिया ज़िन्दगी - जीने का हुनर सिखा दिया,कैसे बदलते हैं लोग चंद कागज़ के टुकड़ो ने बता दिया,अपने परायों की पहचान को आसान बना दिया,शुक्रिया ऐ ज़िन्दगी जीने का हुनर सिखा दिया।

जिंदगी शायरी

Related Post

समझ जाता हूँ मीठे लफ़्ज़ों में छुपे फरेब को,ज़िन्दगी तुझे समझने लगा हूँ आहिस्ता आहिस्ता। जिंदगी शायरी

आहिस्ता चल ऐ ज़िंदगीकुछ क़र्ज़ चुकाने बाकी हैं,कुछ दर्द मिटाने बाकी हैंकुछ फ़र्ज़ निभाने बाकी हैं। - जिंदगी शायरी

कोई जी लेता है( अजय आजाद द्वारा दिनाँक 19-01-2017 को प्रस्तुत )एक साँस सबके हिस्से से हर पल घट जाती है,कोई जी लेता है जिंदगी किसी की कट जाती है। - जिंदगी शायरी

धूप और छाँव कि पतली लकीर पर खड़ा हूँ,दोनों पार यादें हैं सपने हैं उम्मीदें हैंऔर है बहता हुआ वक्त भी - । जिंदगी शायरी

क्या बेचकर हम खरीदें( श्रीकांत दरने द्वारा दिनाँक 01-11-2017 को प्रस्तुत )क्या बेचकर हम खरीदें फुर्सत... ऐ जिंदगी,सब कुछ तो गिरवी पड़ा है जिम्मेदारी के बाजार में। - जिंदगी शायरी

जिंदगी में ये हुनर भी आजमाना चाहिए,अपनों से हो जंग तो हार जाना चाहिए। - जिंदगी शायरी

leaf-right
leaf-right