सनम तेरी निगाहों में -तारीफ़ शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

हम भटकते रहे थे अनजान राहों में,रात दिन काट रहे थे यूँ ही बस आहों में,अब तमन्ना हुई है फिर से जीने की हमें,कुछ तो बात है सनम तेरी इन निगाहों में।

तारीफ़ शायरी

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उसकी कुदरत देखता हूँ तेरी आँखें देखकर,दो पियालों में भरी है कैसे लाखों मन शराब। - तारीफ़ शायरी

उनको सोते हुए देखा( Admin द्वारा दिनाँक 22-09-2015 को प्रस्तुत )उनको सोते हुए देखा था दमे-सुबह कभी,क्या बताऊं जो इन आंखों ने शमां देखा था।~ अज़ीज़ लखनवी - तारीफ़ शायरी

उनकी बातो का दौर( आर्यन वर्मा द्वारा दिनाँक 09-08-2016 को प्रस्तुत )उनकी बातों का दौरउनकी आवाज का दीवाना वो दिन भी क्या दिन थेजब वो पास थे मेरेऔर अजनबी था जमाना। - तारीफ़ शायरी

मेरी निगाह-ए-शौक़ भी कुछ कम नहीं मगर,फिर भी तेरा शबाब तेरा ही शबाब है। - तारीफ़ शायरी

अदा आई, जफा आई,गरूर आया, इताब आया,हजारों आफतें लेकर - हसीनों का शबाब आया। तारीफ़ शायरी

पता नहीं लबों से लब कैसे लगा लेते हैं लोगतुमसे नजरें भी मिल जाये तो होश नहीं रहता । तारीफ़ शायरी

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