साल पुराना लगता है – सैड शायरी

वैसे ही दिन वैसी ही रातें हैं,
वही रोज का फ़साना लगता है,
अभी महीना भी नहीं गुजरा औरयह साल अभी से पुराना लगता है।

- सैड शायरी

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उसके हाथ में थे, मेरे खत के हजार टुकड़े,मेरे एक सवाल के वो कितने जवाब लाई थी। सैड शायरी

सफ़र का पता चला( नदीम अहमद द्वारा दिनाँक 03-12-2017 को प्रस्तुत )छुप-छुप के एहतमाम में सफ़र का पता चला,वो जुदा हो गया तब उसके हुनर का पता चला,जब एक-एक फूल उड़ा ले गई हवा,तब जाकर...

इश्क़ को या खुदा क्यों नजर लग गई,यूँ लगे मेरी हर दुआ बेअसर हो गई,हमने तिनके चुने आशियाँ के लिए,जाने कैसे आँधियों को खबर हो गई। सैड शायरी

उल्फत में अक्सर ऐसा होता है,आँखे हंसती हैं और दिल रोता है,मानते हो तुम जिसे मंजिल अपनी,हमसफर उनका कोई और होता है। - सैड शायरी

अब आयें या न आयें इधर... पूछते चलो,क्या चाहती है उनकी नजर पूछते चलो,हमसे अगर है तर्क-ए-ताल्लुक तो क्या हुआ,यारो कोई तो उनकी खबर पूछते चलो। - सैड शायरी

ज़िन्दगी मिली तो मिली बनकर फ़िज़ा मिली,इतने बड़े गुनाह न किये जितनी बड़ी सज़ा मिली। - सैड शायरी

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