सुहाना मौसम और हवा -शिक़वा शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

सुहाना मौसम और हवा में नमी होगी,आँसुओं की बहती नदी न थमी होगी,मिलना तो हम तब भी चाहेंगे आपसे,जब आपके पास वक़्त औरहमारे पास साँसों की कमी होगी।

शिक़वा शायरी

Related Post

बहुत मसरूफ शायरी( एडमिन द्वारा दिनाँक 31-01-2016 को प्रस्तुत )बहुत मसरूफ हो शायद जो हम को भूल बैठे हो,न ये पूछा कहाँ पे हो न यह जाना के कैसे हो।-------------------------------------- क्यूँ करते हो मेरे दिल...

सुहाना मौसम और हवा( एडमिन द्वारा दिनाँक 10-10-2015 को प्रस्तुत )सुहाना मौसम और हवा में नमी होगी,आँसुओं की बहती नदी न थमी होगी,मिलना तो हम तब भी चाहेंगे आपसे,जब आपके पास वक़्त औरहमारे पास साँसों...

क्यों मेरे चैन-ओ-सुकून के दुश्मन बन गए,दुनिया बड़ी हसीं है किसी और से दिल लगा लेते। शिक़वा शायरी

जब ताल्लुक ही नहीं तो हाल क्या पूछते हो,मैं जैसा भी हूं - बस तुम सा नहीं हूँ । शिक़वा शायरी

जो मनाई है दिवाली, मेरे दिल को जलाके,अब होली भी मना लेना, बची ख़ाक उड़ाके। - शिक़वा शायरी

अधूरी हसरतों का आज भी इलज़ाम है तुम पर,अगर तुम चाहते तो ये मोहब्बत ख़त्म ना होती। शिक़वा शायरी

leaf-right
leaf-right