सूखे पत्तों पर -माँ शायरी

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  • October 31, 2021

नीचे गिरे सूखे पत्तों पर अदब से चलना ज़राकभी कड़ी धूप में तुमनेइनसे ही पनाह माँगी थी।

माँ शायरी

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सूखे पत्तों पर( एडमिन द्वारा दिनाँक 29-11-2016 को प्रस्तुत )नीचे गिरे सूखे पत्तों पर अदब से चलना ज़राकभी कड़ी धूप में तुमनेइनसे ही पनाह माँगी थी। - माँ शायरी

नादान हो जो उम्र गँवाते हो वफा की तलाश में,गर जो आए समझ तो माँ की गोद में जाकर देखो। - माँ शायरी

जिन्दा जज्बात दिल-ए-फौलाद रखता हूँ,अजीज मिजाज ज़ख्म-ए-इलाज रखता हूँ,मुझे क्या खौफ़ इन अंधेरों से माँ,तेरी दुआओं का दीया जो अपने पास रखता हूँ। - माँ शायरी

घर की तलाशी लूंगा( इंज़माम इक़बाल पटेल द्वारा दिनाँक 27-02-2019 को प्रस्तुत )मैं घर की इस बारमुकम्मल तलाशी लूंगा,पता नहीं ग़म छुपाकरहमारे माँ-बाप कहाँ रखते थे? - माँ शायरी

माँ की दुआ कभी खाली नहीं जाती,माँ की बात कभी टाली नहीं जाती,अपने सब बच्चे पाल लेती है बर्तन धोकर,और बच्चों से एक माँ पाली नहीं जाती। - माँ शायरी

माँ की दुआ कभी खाली नहीं जाती,माँ की बात कभी टाली नहीं जाती,अपने सब बच्चे पाल लेती है बर्तन धोकर,और बच्चों से एक माँ पाली नहीं जाती। माँ शायरी

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