हमसफर कोई होता -शिक़वा शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

हमसफर कोई होता तोहम भी बाँट लेते दूरियाँ,राह चलते लोग भलाक्या समझेंगे मेरी मजबूरियाँ।

शिक़वा शायरी

Related Post

घुट घुट के जी रहा हूँ तेरी नौकरी में ऐ दिल,बेहतर तो होगा अब तू कर दे मेरा हिसाब,शिकवे तो कम नहीं है पर क्या करुं शिकायत,कहीं हो न जाएं तुझसे रिश्ते मेरा खराब। शिक़वा...

अब क्यूँ तकलीफ होती है तुम्हें इस बेरुखी से,तुम्हीं ने तो सिखाया है कि दिल कैसे जलाते हैं। शिक़वा शायरी

ज्यादा कुछ नहीं बदलाउनके और मेरे बीच में । शिक़वा शायरी

तुम बेवफा नहीं ये तो धड़कनें भी कहती हैं,अपनी मज़बूरिओं का एक पैगाम तो भेज देते । - शिक़वा शायरी

चाहा था तुम्हें( एडमिन द्वारा दिनाँक 20-10-2017 को प्रस्तुत )तुम मेरे लिए अब कोई इल्जाम न ढूँढो,चाहा था तुम्हें एक यही इल्जाम बहुत है। - शिक़वा शायरी

हमसे प्यार नहीं है तो भुला क्यों नहीं देते,खत किसलिए रखे हैं जला क्यों नहीं देते,किस वास्ते लिखा है हथेली पर मेरा नाम,मैं हर्फ़ गलत हूँ तो मिटा क्यों नहीं देते। - शिक़वा शायरी

leaf-right
leaf-right