हम बिकते रहे -शिक़वा शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

तुझे फुर्सत ही न मिली मुझे पढ़ने की वरना,हम तेरे शहर में बिकते रहे किताबों की तरह।

शिक़वा शायरी

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मेरी मोहब्बत की न सही,मेरे सलीके की तो दाद दे,तेरा ज़िक्र रोज करते हैंतेरा नाम लिए वगैर। - शिक़वा शायरी

फासले बढ़े तो गलतफहमियां और भी बढ़ गयीं,फिर उसने वह भी सुना जो मैंने कहा ही नहीं । शिक़वा शायरी

मैं क़ाबिल ए नफ़रत हूँ तो( Admin द्वारा दिनाँक 22-08-2015 को प्रस्तुत )मैं क़ाबिल-ए-नफ़रत हूँ तो छोड़ दो मुझको,यूं मुझसे दिखावे की मोहब्बत ना किया करो। - शिक़वा शायरी

न मोहब्बत संभाली गई,न नफरतें पाली गईं,बङा अफसोस है उस जिंदगी का,जो तेरे पीछे खाली गई l शिक़वा शायरी

जाने किस बात की उनको शिकायत है मुझसे,नाम तक जिनका नहीं है मेरे अफ़साने में। - शिक़वा शायरी

मेरी मोहब्बत की न सही,मेरे सलीके की तो दाद दे,तेरा ज़िक्र रोज करते हैंतेरा नाम लिए वगैर। शिक़वा शायरी

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