हाथ ज़ख़्मी हुआ – दर्द शायरी

हाथ ज़ख़्मी हुआ तो कुछ मेरी ही खता थी,
लकीरों को बदलना चाहा था किसी को पाने के लिए।

- दर्द शायरी

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ज़ख्म सब भर गए बस एक चुभन बाकी है,हाथ में तेरे भी पत्थर था हजारों की तरह,पास रहकर भी कभी एक नहीं हो सकते,कितने मजबूर हैं दरिया के किनारों की तरह। दर्द शायरी

अगर दर्द हो तो( विजय द्वारा दिनाँक 24-10-2018 को प्रस्तुत )दर्द हो तो कोई मौसम प्यारा नहीं होता,दिल में प्यास हो तो पानी से गुजारा नहीं होता,काश कोई समझ पाता हमारी बेबसी को,हम सबके हो...

जितनी शिद्दत से मुझे ज़ख्म दिए है उसने,इतनी शिद्दत से तो मैंने उसे चाहा भी नहीं था। - दर्द शायरी

रास्ते वही होंगे( नंदिनी नारायण द्वारा दिनाँक 25-11-2016 को प्रस्तुत )रास्ते वही होंगे और नज़ारे वही होंगे, पर हमसफ़र अब हम तुम्हारे नहीं होंगे। - दर्द शायरी

ज़िन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं( एडमिन द्वारा दिनाँक 20-06-2016 को प्रस्तुत )ज़िन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं कुछ और भी है,ज़ुल्फ़-ओ-रुखसार की जन्नत नहीं कुछ और भी है,भूख और प्यास की मारी हुई इस दुनिया में,इश्क ही इक...

सजा कैसी मिली मुझको तुमसे दिल लगाने की,रोना ही पड़ा है जब कोशिश की मुस्कुराने की,कौन बनेगा यहाँ मेरी दर्द-भरी रातों का हमराज,दर्द ही मिला जो तुमने कोशिश की आजमाने की। - दर्द शायरी

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