हुस्न की इन्तेहाँ -तारीफ़ शायरी

  • By Admin

  • October 31, 2021

हुस्न की ये इन्तेहाँ नहीं है तो और क्या है,चाँद को देखा है हथेली पे आफताब लिए हुए।

तारीफ़ शायरी

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कितनी खूबसूरत हैं आँखें तुम्हारी,बना दीजिये इनको किस्मत हमारी,इस ज़िंदगी में हमें और क्या चाहिए,अगर मिल जाए मोहब्बत तुम्हारी। तारीफ़ शायरी

नहीं बसती किसी और की सूरत अब इन आँखो में,काश कि हमने तुझे इतने गौर से ना देखा होता। तारीफ़ शायरी

होठों से छू कर( साहिल द्वारा दिनाँक 09-05-2017 को प्रस्तुत )उसने होठों से छू करदरिया का पानी गुलाबी कर दिया,हमारी तो बात और थी उसनेमछलियों को भी शराबी कर दिया। - तारीफ़ शायरी

अदा आई, जफा आई,गरूर आया, इताब आया,हजारों आफतें लेकर - हसीनों का शबाब आया। तारीफ़ शायरी

तुझको देखेंगे सितारे( राजकुमार सैनी द्वारा दिनाँक 05-03-2017 को प्रस्तुत )तुझको देखेंगे सितारे तो स्याह माँगेंगे,और प्यासे तेरी ज़ुल्फों से घटा माँगेंगे,अपने कंधे से दुपट्टे को ना सरकने देना,वर्ना बूढ़े भी जवानी की दुआ माँगेंगे।...

यह बात यह तबस्सुम( Admin द्वारा दिनाँक 22-08-2015 को प्रस्तुत )यह बात, यह तबस्सुम,यह नाज, यह निगाहें,आखिर तुम्ही बताओक्यों कर न तुमको चाहें। - तारीफ़ शायरी

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