हौसलों के सामने – प्रेरक शायरी

हाथ बाँधे क्यों खड़े हो हादसों के सामने,
हादसे कुछ भी नहीं हैं हौसलों के सामने।

- प्रेरक शायरी

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तकदीर के खेल से निराश नहीं होते,जिंदगी में ऐसे कभी उदास नहीं होते,हाथों की लकीरों पर क्यों भरोसा करते हो,तकदीर उनकी भी होती है जिनके हाथ नहीं होते। - प्रेरक शायरी

उंगली पकड़ के जिसकी खड़े हो गये हम,माँ बाप की दुआ से बड़े हो गये हम,हम आँधियों से जूझ के हँसते ही रहे हैं,फौलाद से भी ज्यादा कड़े हो गये हम। प्रेरक शायरी

उसने उड़ान ली( हरिशंकर पाण्डेय द्वारा दिनाँक 14-05-2018 को प्रस्तुत )जब तक कदम रुके रहे तब तेज थी हवा,नजरें उठाई जैसे ही तूफान रुक गया,एक पैतरे के साथ ही बिजली चमक उठी,उसने उड़ान ली तो...

ज़िन्दगी भोर है( एडमिन द्वारा दिनाँक 27-10-2015 को प्रस्तुत )हो के मायूस न यूं शाम से ढलते रहिये,ज़िन्दगी भोर है सूरज सा निकलते रहिये,एक ही पाँव पे ठहरोगे तो थक जाओगे,धीरे-धीरे ही सही राह पे...

जीत की ख़ातिर बस जूनून चाहिए,जिसमें उबाल हो ऐसा खून चाहिए,ये आसमां भी आ जाएगा ज़मीं पर,बस इरादों में जीत की गूँज चाहिए। - प्रेरक शायरी

बेहतर से बेहतर की तलाश करो,मिल जाए नदी तो समंदर की तलाश करो,टूट जाते हैं शीशे पत्थरों की चोट से,तोड़ दे पत्थर ऐसे शीशे की तलाश करो। - प्रेरक शायरी

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