ग़म-ए-आरज़ू – ग़म शायरी

ग़म-ए-आरज़ू तेरी राह में,
शब्-ए-आरज़ू तेरी चाह में,
जो उजड़ गया वो बसा नहीं,
जो बिछड़ गया वो मिला नहीं।

- ग़म शायरी

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क्या जाने किसको किससे हैअब दाद की तलब,वह ग़म जो मेरे दिल में हैतेरी नज़र में है। ग़म शायरी

पत्थर बना दिया( एडमिन द्वारा दिनाँक 01-02-2019 को प्रस्तुत )पत्थर बना दिया मुझे रोने नहीं दिया,दामन भी तेरे ग़म ने भिगोने नहीं दिया,तन्हाईयाँ तुम्हारा पता पूछती रहीं,शब् भर तुम्हारी याद ने सोने नहीं दिया,आँखों में...

जीने का मतलब मैंने मोहब्बत में पा लिया,जिसका भी ग़म मिला उसे अपना बना लिया,आप रोकर भी ग़म न हल्का कर सके,मैंने हँसी की आढ़ में हर ग़म छुपा लिया। ग़म शायरी

ज़िन्दगी हमारी यूँ सितम हो गई,खुशी न जाने कहाँ दफन हो गई,लिखी खुदा ने मोहब्बत सबकी तकदीर में,हमारी बारी आई तो स्याही खत्म हो गई। ग़म शायरी

फिर तेरा चर्चा हुआ, आँखें हमारी नम हुई,धड़कनें फिर बढ़ गई, साँस फिर बेदम हुई,चाँदनी की रात थी, तारों का पहरा भी था,इसीलिये शायद गम की आतिशबाजी कम हुई। ग़म शायरी

खुश्क आँखों से भी अश्कों की महक आती है,तेरे ग़म को ज़माने से मैं छुपाऊं कैसे। - ग़म शायरी

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