ग़म कोई समझ न पाया -ग़म शायरी

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  • October 31, 2021

एक हसरत थी सच्चा प्यार पाने की,मगर चल पड़ी आँधियां जमाने की,मेरा ग़म तो कोई ना समझ पाया,क्यूंकि मेरी आदत थी सबको हँसाने की।

ग़म शायरी

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दे गया ग़म मुझे तोहफे में मिला वो जब भी,मैंने एक शख्स को क्यूँ कर भला समझा अपना। ग़म शायरी

ग़म-ए-इश्क रह गया है ग़म-ए-जुस्तज़ू में ढलकर,वो नजर से छुप गए हैं मेरी जिंदगी बदल कर। - ग़म शायरी

हमसे पूछो किसीको खोने का ग़म क्या होता है,हँसते हँसते रोने का दर्द क्या होता है,खुदा उसी से क्यों मिला देता है हमें,जिसका साथ किस्मत में नहीं होता है। ग़म शायरी

जीने का मतलब मैंने मोहब्बत में पा लिया,जिसका भी ग़म मिला उसे अपना बना लिया,आप रोकर भी ग़म न हल्का कर सके,मैंने हँसी की आढ़ में हर ग़म छुपा लिया। - ग़म शायरी

क्या जाने किसको किससे हैअब दाद की तलब,वह ग़म जो मेरे दिल में हैतेरी नज़र में है। ग़म शायरी

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