ग़म भी उनका अज़ीज – ग़म शायरी

मुझे ग़म भी उनका अज़ीज हैकि उन्हीं की दी हुई चीज़ है,
यही ग़म है अब मेरी जिंदगीइसे कैसे दिल से जुदा करूँ।

- ग़म शायरी

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ऐसा नहीं के तेरे बाद अहल-ए-करम नहीं मिले,तुझ सा नहीं मिला कोई, लोग तो कम नहीं मिले,एक तेरी जुदाई के दर्द की बात और है,जिनको न सह सके ये दिल, ऐसे तो गम नहीं मिले।...

महफ़िल में हँसना( दुर्गेश मिश्र द्वारा दिनाँक 15-10-2016 को प्रस्तुत )महफ़िल में हँसना हमारा मिजाज बन गया,तन्हाई में रोना एक राज बन गया,दिल के दर्द को चेहरे से जाहिर न होने दिया,बस यही जिंदगी जीने...

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माँगने से मिल सकती नहीं हमें एक भी ख़ुशी,पाये हैं लाख रंज तमन्ना किये बगैर..।। ग़म शायरी

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तुमने भी हमें बस एक दीये की तरह समझा,रात हुई तो जला दिया सुबह हुई तो बुझा दिया। - ग़म शायरी

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