ग़म भी मेरे नाम – ग़म शायरी

शायद उसे अजीज़ थीं मेरी उदासियाँ,
जाने लगा तो ग़म भी मेरे नाम कर दिया।

- ग़म शायरी

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वो सूरज की तरह आग उगलते रहे, हम मुसाफिर सफ़र पे ही चलते रहे, वो बीते वक़्त थे, उन्हें आना न था, हम सारी रात करवट बदलते रहे। - ग़म शायरी

जीने का मतलब मैंने मोहब्बत में पा लिया,जिसका भी ग़म मिला उसे अपना बना लिया,आप रोकर भी ग़म न हल्का कर सके,मैंने हँसी की आढ़ में हर ग़म छुपा लिया। ग़म शायरी

गम की आतिशबाजी( एडमिन द्वारा दिनाँक 30-11-2016 को प्रस्तुत )फिर तेरा चर्चा हुआ, आँखें हमारी नम हुई,धड़कनें फिर बढ़ गई, साँस फिर बेदम हुई,चाँदनी की रात थी, तारों का पहरा भी था,इसीलिये शायद गम की...

सिसकती हुई ज़िन्दगी का मजा हमसे पूछिये,मोहब्बत में जो मिली वो सजा हमसे पूछिए,क्यों फिरते हो उदास तुम इस गम की तलाश में,गम की हर गली का पता हमसे पूछिए। ग़म शायरी

ग़म का फसाना है( एडमिन द्वारा दिनाँक 14-03-2018 को प्रस्तुत )शिकायत क्या करूँ दोनों तरफ ग़म का फसाना है,मेरे आगे मोहब्बत है तेरे आगे ज़माना है,पुकारा है तुझे मंजिल ने लेकिन मैं कहाँ जाऊं,बिछड़ कर...

गम तो है हर एक को,मगर हौंसला है जुदा- जुदा,कोई टूट कर बिखर गया,कोई मुस्कुरा के चल दिया । ग़म शायरी

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