2 Line Shayari Meri Har Baat Ko – 2 Line Shayari

मेरी हर बात को उल्टा वो समझ लेते हैं,
अब के पूछा तो कह दूंगा कि हाल अच्छा है..


खामोशियाँ में शोर को सुना है मैंने,
ये ग़ज़ल गुंगुनायेगी रात के साये में ।


मिला क्या हमें सारी उम्र मोहब्बत करके,
बस एक शायरी का हुनर, एक रातों का जागना..


ना पीछे मुड़ के देखो, ना आवाज़ दो मुझको,
बड़ी मुश्किल से सीखा है मैंने अलविदा कहना..!


कभी टूटा नहीं मेरे दिल से तेरी यादों का रिश्ता..
गुफ़्तगू किसी से भी हो ख़याल तेरा ही रहता है..


ना छेड़ किस्सा वोह उल्फत का बड़ी लम्बी कहानी है
मैं जिन्दगी से नहीं हारा किसी अपने की मेहरबानी है


हर किसी के हाथ मैं बिक जाने को हम तैयार नहीं..
यह मेरा दिल है तेरे शहर का अख़बार नहीं..


आज भी एक सवाल छिपा है.. दिल के किसी कोने मैं..
की क्या कमी रह गईथी तेरा होने में.


मेरी लिखी किताब, मेरे ही हाथो मे देकर वो कहने लगे
इसे पढा करो, मोहब्बत करना सिख जाओगे..!!


इतनी चाहत तो लाखो रुपए पाने की भी नही होती..
जितनी बचपन की तस्वीर देख कर बचपन में जाने की होती हैं

- 2 Line Shayari

Related Post

चुपचाप चल रहे थे.. हम अपनी मंजिल की तरफ.. फिर रस्ते में एक ठेका पड़ा.. और हम गुमराह हो गए। ऐ जीन्दगी जा ढुंड॒ कोई खो गया है मुझ से. अगर वो ना मिला तो...

दीवाना उस ने कर दिया एक बार देख कर, हम कर सके न कुछ भी लगातार देख कर। दिखने में वो बहुत गरीब थी साहब पर.. उसकी हँसी किसी शहजादी से कम नहीं थी। सुबह...

एक सवाल पूछती है मेरी रूह अक्सर.. मैंने दिल लगाया है या ज़िंदगी दाँव पर। किसी पर मर जाने से शुरू होती है.. मोहब्बत, इश्क़ जिंदा लोगों का काम नहीं। ख़्वाहिश को ख़्वाहिश ही रहने...

चाँद भी झाँकता है खिड़कियों से, मेरी तन्हाईयों की चर्चा अब आसमानों में है। ? वहाँ मोहब्बत में पनाह मिले भी तो कैसे, जहाँ मोहब्बत बे पनाह हो। ?? किसी ने मुझसे पूछा ज़िन्दगी कैसे...

तेरे हुस्न पर तारीफों भरी किताब लिख देता, काश तेरी वफा तेरे हुस्न के बराबर होती। कमी तो होनी ही है पानी की, शहर में, न किसी की आँख में बचा है, न किसी के...

तु मुझसे मेरे गुनाहों का हिसाब ना मांग मेरे खुदा मेरी तकदीर लिखने में, कलम तो तेरी ही चली थी। यूँ ही नहीं होती हाँथ की लकीरों के आगे उँगलियाँ, रब ने भी किस्मत से...

leaf-right
leaf-right