2 Line Shayari Pata Nahi Kab Jayegi – 2 Line Shayari

पता नही कब जाएगी तेरी लापरवाही की आदत..
पगली कुछ तो सम्भाल कर रखती, मुझे भी खो दिया।


तू होश में थी फिर भी हमें पहचान न पायी,
एक हम है कि पी कर भी तेरा नाम लेते रहे।


आ जाते हैं वो भी रोज ख्बाबो मे,
जो कहते हैं हम तो कही जाते ही नही।


मोहब्बत का कोई रंग नही फिर भी वो रंगीन है,
प्यार का कोई चेहरा नही फिर भी वो हसीन हैं।


तुम्हें चाहने की वजह कुछ भी नहीं,
बस इश्क की फितरत है, बे-वजह होना।


हाल तो पूछ लू तेरा पर डरता हूँ आवाज़ से तेरी,
ज़ब ज़ब सुनी है कमबख्त मोहब्बत ही हुई है।


यह इनाएतें गज़ब की यह बला की मेहेरबानी,
मेरी खेरियत भी पूछी किसी और की ज़बानी।


जरूरत है मुझे नये नफरत करने वालाे की,
पुराने ताे अब मुझे चाहने लगे है।


चलते रहेगें शायरी के दौर मेरे बिना भी…
एक शायर के कम हो जाने से शायरी खत्म नहीं हो जाती।


सुनो तुम दिल दुखाया करो इजाजत है
बस कभी भूलने की बात मत करना।

- 2 Line Shayari

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