Ho Ke Mayus Na Yu Sham Se Dhalte Rahiye – Ghazal

हो के मायूस न यूं शाम-से ढलते रहिये
ज़िन्दगी भोर है सूरज-से निकलते रहिये
एक ही ठांव पे ठहरेंगे तो थक जायेंगे
धीरे-धीरे ही सही राह पे चलते रहिये
आपको ऊँचे जो उठना है तो आंसू की तरह
दिल से आँखों की तरफ हँस के उछलते रहिये
शाम को गिरता है तो सुबह संभल जाता है
आप सूरज की तरह गिर के संभलते रहिये
प्यार से अच्छा नहीं कोई भी सांचा ऐ ‘कुँअर’
मोम बनके इसी सांचे में पिघलते रहिये
– कुँअर बेचैन

By quotesbogie

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