Khushboo Jaise Log Mile Afsaane Mein

  • By Admin

  • November 14, 2020

खुशबू जैसे लोग मिले अफ़साने में एक पुराना खत खोला अनजाने में जाना किसका ज़िक्र है इस अफ़साने में दर्द मज़े लेता है जो दुहराने में शाम के साये बालिस्तों से नापे हैं चाँद ने कितनी देर लगा दी आने में रात गुज़रते शायद थोड़ा वक्त लगे ज़रा सी धूप दे उन्हें मेरे पैमाने में दिल पर दस्तक देने ये कौन आया है किसकी आहट सुनता है वीराने मे । Gulzar

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