Sau Chand Bhi Chamkenge To Kya Baat Banegi

  • By Admin

  • November 14, 2020

सौ चांद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी तुम आये तो इस रात की औक़ात बनेगी  उन से यही कह आये कि हम अब न मिलेंगे  आख़िर कोई तक़रीब-ए-मुलाक़ात बनेगी  ये हम से न होगा कि किसी एक को चाहें ऐ इश्क़! हमारी न तेरे साथ बनेगी  हैरत कदा-ए-हुस्न कहाँ है अभी दुनिया कुछ और निखर ले तो तिलिस्मात बनेगी  ये क्या के बढ़ते चलो बढ़ते चलो आगे  जब बैठ के सोचेंगे तो कुछ बात बनेगी Jaan Nissar Akhtar

Related Post

भरोसा मत करो साँसों की डोरी टूट जाती है छतें महफ़ूज़ रहती हैं हवेली टूट जाती है मुहब्बत भी अजब शय है वो जब परदेस में रोये तो फ़ौरन हाथ की एक-आध चूड़ी टूट जाती...

उँगलियाँ यूँ न सब पर उठाया करो  खर्च करने से पहले कमाया करो ज़िन्दगी क्या है खुद ही समझ जाओगेबारिशों में पतंगें उड़ाया करोदोस्तों से मुलाक़ात के नाम पर नीम की पत्तियों को चबाया करो शाम के बाद...

दर ओ दीवार पे शकलें से बनाने आई फिर ये बारिश मेरी तनहाई चुराने आई ज़िंदगी बाप की मानिंद सजा देती है रहम-दिल माँ की तरह मौत बचाने आई आज कल फिर दिल-ए-बर्बाद की बातें...

फिरे राह से वो यहाँ आते आते अजल मेरी रही तू कहाँ आते आते मुझे याद करने से ये मुद्दा था निकल जाए दम हिचकियां आते आते कलेजा मेरे मुंह को आएगा इक दिन यूं...

तमाम उम्र अज़ाबों का सिलसिला तो रहा  ये कम नहीं हमें जीने का हौसला तो रहा  गुज़र ही आये किसी तरह तेरे दीवाने  क़दम क़ादम पे कोई सख़्त मरहला तो रहा  चलो न इश्क़ ही...

गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं हम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं बच निकलते हैं अगर आतिह-ए-सय्याद से हम शोला-ए-आतिश-ए-गुलफ़ाम से जल जाते हैं ख़ुदनुमाई तो नहीं शेवा-ए-अरबाब-ए-वफ़ा जिन को जलना हो वो...

leaf-right
leaf-right