Tamam Umr Azabo Ka Silsila To Raha

  • By Admin

  • November 14, 2020

तमाम उम्र अज़ाबों का सिलसिला तो रहा  ये कम नहीं हमें जीने का हौसला तो रहा  गुज़र ही आये किसी तरह तेरे दीवाने  क़दम क़ादम पे कोई सख़्त मरहला तो रहा  चलो न इश्क़ ही जीता न अक़्ल हार सकी  तमाम वक़्त मज़े का मुक़ाबला तो रहा  मैं तेरी ज़ात में गुम हो सका न तू मुझ में  बहुत क़रीब थे हम फिर भी फ़ासला तो रहा  ये और बात कि हर छेड़ लाउबाली थी  तेरी नज़र का दिलों से मुआमला तो रहा  बहुत हसीं सही वज़ए-एहतियात तेरी  मेरी हवस को तेरे प्यार से गिला तो रहा Jaan Nissar Akhtar

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इश्क़ लामहदूद जब तक रहनुमा होता नहीं  ज़िन्दगी से ज़िन्दगी का हक़ अदा होता नहीं  इस से बढ़कर दोस्त कोई दूसरा होता नहीं  सब जुदा हो जायेँ लेकिन ग़म जुदा होता नहीं  बेकराँ होता नहीं...

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