Ujdi Ujdi Hui Har Aas Lage

  • By Admin

  • November 14, 2020

उजड़ी-उजड़ी हुई हर आस लगे ज़िन्दगी राम का बनबास लगे तू कि बहती हुई नदिया के समान तुझको देखूँ तो मुझे प्यास लगे फिर भी छूना उसे आसान नहीं इतनी दूरी पे भी, जो पास लगे वक़्त साया-सा कोई छोड़ गया ये जो इक दर्द का एहसास लगे एक इक लहर किसी युग की कथा मुझको गंगा कोई इतिहास लगे शे’र-ओ-नग़्मे से ये वहशत तेरी खुद तिरी रूह का इफ़्लास लगे Jaan Nissar Akhtar

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दिल में तुम हो नज़अ  का हंगाम है  कुछ सहर  का वक़्त है कुछ शाम है   इश्क़ ही ख़ुद इश्क़ का इनआम है वाह क्या आग़ाज़ क्या अंजाम है दर्द-ओ-ग़म दिल की तबीयत बन...

मेरी चिन्ता न करो मैं तो सँभल जाऊँगा गीली मिट्टी हूँ कि हर रूप में ढल जाऊँगा मै कोई चाँद नहीं हूँ कि अमर हो जाऊँ मैं तो जुगनू हूँ सुबह धूप में जल जाऊँगा...

अथक प्रयास के उजले विचार से निकली हमारी जीत, निरंतर जुझार से निकली हरेक युद्ध किसी संधि पर समाप्त हुआ अमन की राह हमेशा प्यार से निकली जो मन का मैल है, उसको तो व्यक्त...

काम यही है शाम सवेरे तेरी गली के सौ सौ फेरे सामने वो हैं जुल्फ बिखेरे कितने हसीं है आज अँधेरे हम तो हैं तेरे पूजने वाले पाँव न पड़वा तेरे मेरे दिल को चुराया...

न जाओ हाल-ए-दिल-ए-ज़ार देखते जाओ कि जी न चाहे तो नाचार देखते जाओ बहार-ए-उमर् में बाग़-ए-जहाँ की सैर करो खिला हुआ है ये गुलज़ार देखते जाओ उठाओ आँख, न शरमाओ ,ये तो महिफ़ल है ग़ज़ब...

अब हलो हाय में ही बात हुआ करती है रास्ता चलते मुलाक़ात हुआ करती है दिन निकलता है तो चल पड़ता हूं सूरज की तरह थक के गिर पड़ता हूं जब रात हुआ करती है...

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