Zamana Aaj Nahi Dagmaga Ke Chalne Ka

  • By Admin

  • November 14, 2020

ज़माना आज नहीं डगमगा के चलने का  सम्भल भी जा कि अभी वक़्त है सम्भलने का  बहार आये चली जाये फिर चली आये  मगर ये दर्द का मौसम नहीं बदलने का  ये ठीक है कि सितारों पे घूम आये हैं  मगर किसे है सलिक़ा ज़मीं पे चलने का  फिरे हैं रातों को आवारा हम तो देखा है  गली गली में समाँ चाँद के निकलने का  तमाम नशा-ए-हस्ती तमाम कैफ़-ए-वजूद  वो इक लम्हा तेरे जिस्म के पिघलने का Jaan Nissar Akhtar

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